संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किए जाने से छत्तीसगढ़ में बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता और रोकथाम के प्रयासों को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। इस वैश्विक मान्यता से राज्य सरकार के उन प्रयासों को नई दिशा मिली है, जिनके तहत बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में राज्य सरकार इस सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर और प्रभावी कदम उठा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिला तथा मैदानी स्तर पर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि समाज के हर वर्ग तक बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी पहुंचाई जा सके।
यह ऐतिहासिक निर्णय भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि ठीक इसी तारीख यानी 27 नवंबर 2024 को देश में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का शुभारंभ किया गया था। भारत की इस जन-कल्याणकारी मुहिम को अब वैश्विक स्तर पर पहचान मिलना देश और राज्यों के सामूहिक प्रयासों की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ में शासन, प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, स्थानीय पंचायतों, स्कूलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के आपसी तालमेल से सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली बालिकाओं का प्रतिशत 12.1 था, जो एनएफएचएस-6 (2023-24) में घटकर 10.1 प्रतिशत पर आ गया है।
बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ राज्य में ग्रामीण और शहरी स्तर पर मजबूत बाल संरक्षण तंत्र विकसित किया गया है। समुदायों, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं और पुलिस की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है ताकि कहीं से भी बाल विवाह की सूचना मिलते ही समय रहते कानूनी कार्रवाई कर इसे रोका जा सके।
इस दिशा में गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका भी सराहनीय रही है, जिसमें ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) और उसके सहयोगी संगठन प्रमुख हैं। इन संगठनों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में मैदानी स्तर पर सक्रिय रहकर कुल 8,414 बाल विवाहों को समय रहते रुकवाने में बड़ी सफलता हासिल की है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में सिएरा लियोन द्वारा भारत समेत 67 देशों के समर्थन से इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय घोषणा के बाद अब छत्तीसगढ़ सरकार का संकल्प और अधिक मजबूत हुआ है, जिसका मुख्य लक्ष्य 2030 तक राज्य से बाल विवाह की प्रथा का पूरी तरह उन्मूलन करना है।

