छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से सामने आई यह खबर सुरक्षा बलों और राज्य सरकार के लिए पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक मानी जा रही है। एक साथ 108 नक्सलियों का मुख्यधारा में लौटना यह साफ संकेत देता है कि माओवादी विचारधारा की पकड़ अब अपने ही कैडरों पर कमजोर पड़ती जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला पहलू वह भारी-भरकम बरामदगी है, जिसने नक्सलियों के ‘फंडिंग नेटवर्क’ की कमर तोड़ दी है।
सुरक्षा बलों को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर नक्सलियों के एक गुप्त ठिकाने (डंप) से 3 करोड़ 61 लाख रुपये की भारी नकदी और लगभग एक किलो शुद्ध सोना बरामद किया गया है। नक्सली आंदोलन के इतिहास में यह संभवतः अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक बरामदगी है। जानकारों का मानना है कि यह वह पैसा था जिसे लेवी और वसूली के जरिए जमा किया गया था और भविष्य के ऑपरेशन्स के लिए सुरक्षित रखा गया था।
आत्मसमर्पण करने वाले इन 108 नक्सलियों में 44 महिलाएं शामिल हैं, जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि संगठन के भीतर महिलाओं के शोषण या भेदभाव के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। गौर करने वाली बात यह भी है कि आत्मसमर्पण करने वाले इन सदस्यों पर कुल मिलाकर 3 करोड़ 29 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिनमें कई इनामी कमांडर और खूंखार कैडर भी शामिल हैं। इनके साथ ही 101 हथियार भी पुलिस को सौंपे गए हैं, जिससे इलाके में हिंसक गतिविधियों में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।
सरकार की ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइए) जैसी योजनाओं और अंदरूनी इलाकों में खुल रहे नए पुलिस कैंपों ने नक्सलियों के सप्लाई चेन को पूरी तरह बाधित कर दिया है। मुख्यधारा में शामिल हुए इन लोगों ने अपने बयान में संगठन के भीतर बढ़ते भेदभाव, बाहरी नेताओं के दबाव और विकास की इच्छा को आत्मसमर्पण का मुख्य कारण बताया है। अब प्रशासन इन सभी को पुनर्वास नीति के तहत सहायता राशि और जीवन यापन के नए साधन उपलब्ध कराएगा, ताकि वे फिर कभी हिंसा की राह पर न लौटें।

