छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक बार फिर बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य सरकार और परिवहन विभाग के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन बस हड़ताल का रास्ता चुना जाएगा, जिससे आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ना तय है।
महासंघ की प्रमुख मांगों में सबसे अहम मुद्दा यात्री किराए में संशोधन और टैक्स का बोझ कम करना है। बस संचालकों का कहना है कि डीजल, पार्ट्स और अन्य खर्चे लगातार बढ़ने के कारण मौजूदा किराए में परिचालन करना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही, बसों में सिंगल स्लीपर पर दोहरा टैक्स वसूलने के बजाय केवल सिंगल टैक्स लिए जाने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई गई है, जिसे लेकर संचालकों में लंबे समय से असंतोष है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बसों के संचालन को लेकर भी नियमों में स्पष्टता और बदलाव की मांग की गई है। महासंघ ने मांग की है कि नई ई-बसों का संचालन केवल शहर की सीमा के भीतर ही सीमित रखा जाए। इसके अलावा, ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट पर चलने वाली बसों के ग्रामीण इलाकों और मुख्य बस स्टैंडों से संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए ताकि नियमित स्टेज कैरिज बसों के कारोबार को बचाया जा सके।
प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग भी इस ज्ञापन का एक मुख्य हिस्सा है। बस संचालकों ने वीएलटीडी (VLTD) डिवाइस के रिन्यूअल शुल्क में भारी कमी किए जाने की मांग की है। उनका तर्क है कि वर्तमान में इसके नवीनीकरण की दरें काफी अधिक हैं, जिससे ट्रांसपोर्टर्स पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है। साथ ही, फिटनेस जांच प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए मैनुअल फिटनेस सर्टिफिकेट की सुविधा दोबारा शुरू करने की मांग की गई है।
परमिट और समय सारणी के प्रबंधन को लेकर भी महासंघ ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। संचालकों का कहना है कि स्टेज कैरिज बसों के समयचक्र में दो बसों के बीच उचित समय अंतराल तय किया जाना चाहिए ताकि प्रतिस्पर्धा के नाम पर मनमानी और यात्रियों की असुरक्षा रोकी जा सके। इसके अलावा, परमिट प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए सभी प्रकार की बसों के वास्ते ऑनलाइन परमिट बनाने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने इस पूरे मामले में सरकार को एक सख्त समयसीमा दी है। महासंघ द्वारा जारी पत्र के मुताबिक, यदि 21 सितंबर 2026 तक शासन-प्रशासन स्तर पर इन नौ सूत्रीय मांगों पर कोई सकारात्मक विचार या ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 22 सितंबर 2026 से राज्य भर में यात्री बसों का पहिया अनिश्चितकाल के लिए थम जाएगा।
इस अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी के बाद से प्रदेश के यात्रियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। रोजाना सफर करने वाले दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और सुदूर ग्रामीण अंचलों से शहर आने-जाने वाले आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें परिवहन विभाग और शासन के रुख पर टिकी हैं कि वे इस संभावित संकट को टालने के लिए बस संचालकों के साथ किस प्रकार का संवाद और समाधान निकालते हैं।

