इंटरपोल का दुनिया भर में बड़ा प्रहार: ‘ऑपरेशन सिनर्जिया III’ के तहत 72 देशों में साइबर अपराधियों का नेटवर्क ध्वस्त
ल्योन (फ्रांस): अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन ‘इंटरपोल’ ने साइबर अपराध के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े वैश्विक अभियानों में से एक, ‘ऑपरेशन सिनर्जिया III’ (Operation Synergia III) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस व्यापक कार्रवाई के तहत भारत सहित दुनिया के 72 देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ मिलकर डिजिटल अपराधियों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य फिशिंग, रैनसमवेयर और मालवेयर फैलाने वाले उन बुनियादी ढांचों को नष्ट करना था, जो आम जनता की मेहनत की कमाई और निजी डेटा पर सेंध लगा रहे थे।
इस ऑपरेशन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच एजेंसियों ने दुनिया भर में सक्रिय 45,000 से अधिक खतरनाक IP एड्रेस और आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे सर्वरों को ब्लॉक कर दिया है। 18 जुलाई 2025 से शुरू होकर 31 जनवरी 2026 तक चले इस अभियान के दौरान अब तक 94 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 110 अन्य संदिग्ध अभी भी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रडार पर हैं। इस पूरे अभियान का संचालन और समन्वय फ्रांस के ल्योन स्थित इंटरपोल मुख्यालय से किया गया।
जांच के दौरान साइबर अपराधियों के काम करने के बेहद चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं। अपराधी मुख्य रूप से फिशिंग (Phishing) और नकली वेबसाइटों का सहारा लेकर लोगों को झांसा देते थे। इन वेबसाइटों को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि वे असली बैंकिंग पोर्टल या ई-कॉमर्स साइट जैसी दिखें, जिससे उपयोगकर्ता अपनी बैंकिंग डिटेल, क्रेडिट कार्ड की जानकारी और पासवर्ड वहां दर्ज कर देते थे। इसके अलावा, रैनसमवेयर के जरिए संस्थानों के डेटा को ‘हाइजैक’ कर फिरौती वसूलने के मामलों में भी इस ऑपरेशन के जरिए बड़ी सफलता मिली है।
क्षेत्रीय स्तर पर कार्रवाई की बात करें तो मकाऊ में साइबर अपराध का एक विशाल गढ़ मिला, जहाँ 33,000 से अधिक ऐसी फर्जी वेबसाइटें सक्रिय थीं, जो ऑनलाइन कैसीनो और नकली बैंकिंग सेवाओं के नाम पर लोगों को लूट रही थीं। वहीं, अफ्रीकी देश टोगो में एक अलग तरह का संगठित अपराध सामने आया, जहाँ अपराधी सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक कर ‘रोमांस स्कैम’ और ‘सेक्सटॉर्शन’ (ब्लैकमेलिंग) के जरिए लोगों से पैसे वसूल रहे थे। टोगो की पुलिस ने यहाँ से 10 मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।
दक्षिण एशिया में बांग्लादेश पुलिस ने इस अभियान के तहत आक्रामक रुख अपनाते हुए 40 से अधिक आरोपियों को हिरासत में लिया और उनके पास से 134 हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए। भारत में भी केंद्रीय एजेंसियों ने इंटरपोल के साथ मिलकर कई संदिग्ध डिजिटल लिंक और सर्वरों की पहचान की, जिनका इस्तेमाल भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था। इस ऑपरेशन में केवल सरकारी एजेंसियां ही नहीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा कंपनियों ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया।
इंटरपोल के साइबर क्राइम निदेशक नील जेटन ने इस सफलता पर कहा कि आज के दौर में साइबर अपराध पहले से कहीं अधिक जटिल और संगठित हो चुके हैं। अपराधी इंटरनेट की गुमनामी का फायदा उठाकर सीमाओं के पार से वार करते हैं, लेकिन ‘ऑपरेशन सिनर्जिया III’ ने यह साबित कर दिया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एजेंसियां एकजुट होकर काम करें, तो इन नेटवर्क को जड़ से उखाड़ा जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर छिपकर अपराध करने वाले अब सुरक्षित नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। हालांकि, हजारों सर्वर बंद होने के बावजूद विशेषज्ञों ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि साइबर अपराधी लगातार अपनी तकनीक बदल रहे हैं। आने वाले समय में इंटरपोल और सदस्य देश ऐसे और भी कड़े वैश्विक अभियानों को जारी रखने की योजना बना रहे हैं, ताकि आम नागरिक बिना किसी डर के डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकें।

