वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में तनाव एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में शुरू हुए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” (Operation Epic Fury) के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को आक्रामक रूप से बढ़ा दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने जापान स्थित 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) से लगभग 2,500 मरीन सैनिकों की तत्काल तैनाती की घोषणा की है। यह कदम फारस की खाड़ी में ऊर्जा ढांचे और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन पर ईरान के बढ़ते खतरों के जवाब में उठाया गया है।
सैन्य मोर्चे पर अमेरिका ने अपनी सबसे घातक तकनीक का प्रदर्शन किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि B-2 स्पिरिट स्टील्थ बमवर्षकों ने ईरान के भीतर गहरे लक्ष्यों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन केंद्रों, भूमिगत भंडारण सुविधाओं और नौसैनिक ठिकानों को पंगु बनाना है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई वैश्विक तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने और ईरान की भविष्य में पलटवार करने की क्षमता को समाप्त करने के लिए अनिवार्य थी।
इस सैन्य अभियान के बीच ईरान की राजधानी तेहरान से दहला देने वाली खबरें आ रही हैं। ‘कुद्स दिवस’ के दौरान, जब हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब शहर के एक मुख्य चौक पर भीषण विस्फोट हुआ। ईरानी सरकारी मीडिया के दावों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक देश के भीतर 1,300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, लेबनान में इजरायली हमलों के कारण मरने वालों का आंकड़ा 773 तक पहुँच गया है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं। इसके विपरीत, इजरायल ने अपने पक्ष में केवल 12 मौतों की पुष्टि की है।
अमेरिकी नौसेना की शक्ति का नेतृत्व USS Tripoli (LHA-7) कर रहा है, जो तीन एम्फीबियस जहाजों के बेड़े के साथ फारस की खाड़ी में तैनात है। यह बेड़ा न केवल हवाई हमलों में सक्षम है, बल्कि किसी भी जमीनी हस्तक्षेप के लिए मरीन सैनिकों को त्वरित सहायता प्रदान कर सकता है। हालांकि, इस आक्रामक अभियान के दौरान अमेरिका को एक बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ा है। पश्चिमी इराक में ईंधन भरने वाला विमान KC-135 Stratotanker दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें चालक दल के सभी 6 सदस्यों की मौत हो गई। इस हादसे के साथ ही ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी सैनिकों की कुल मौत का आंकड़ा कम से कम 13 हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का उद्देश्य केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य रीढ़ को तोड़ना है। तेहरान में हुए विस्फोटों और हवाई हमलों ने क्षेत्र में पूर्ण युद्ध (Full-scale war) की स्थिति पैदा कर दी है। रक्षा सचिव हेगसेथ ने दोहराया है कि अमेरिकी सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है और स्थिति की निगरानी पल-पल की जा रही है। इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है, जहाँ तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को चिंता में डाल दिया है।

