छत्तीसगढ़ में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और औषधीय ज्ञान के संरक्षण की दिशा में सरकार ने एक ऐतिहासिक और ठोस कदम उठाया है। इस पहल के तहत प्रदेश के 6 जिलों के 309 पारंपरिक वैद्यों को स्वैच्छिक प्रमाणन के अंतर्गत आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। यह अनूठी पहल राज्य की प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं को सहेजने और उन्हें आधुनिक समाज के साथ जोड़ने का एक बड़ा प्रयास है।
इस सिलसिले में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा कोण्डागांव में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जिन्होंने अपने हाथों से वैद्यों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर पारंपरिक वैद्यों में एक नया उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में हमारी सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और वन्य औषधियों के संरक्षण हेतु पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह स्वास्थ्य परंपरा पूरे छत्तीसगढ़ की एक अमूल्य और ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे बचाए रखना हम सबका दायित्व है।
मंत्री श्री कश्यप ने पारंपरिक वैद्यों के ज्ञान की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह ज्ञान औषधीय वनस्पतियों की पहचान और पीढ़ियों के लंबे अनुभवों पर पूरी तरह आधारित है। इस बहुमूल्य ज्ञान का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण (Documentation) करना बेहद आवश्यक है, ताकि यह विलुप्त न हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
औषधीय पौधों के संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए वन मंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंचायतों की उपलब्ध भूमि, घरों की बाड़ियों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर औषधीय पौधों के रोपण को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जाए। इससे न केवल हरियाली बढ़ेगी बल्कि घर-आंगन में ही जड़ी-बूटियों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
इसके साथ ही, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए स्थानीय वन उत्पादों, औषधीय पौधों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की बेहतर ब्रांडिंग, प्रसंस्करण (Processing) और विपणन (Marketing) पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने साल बीज सहित अन्य वन उत्पादों के मूल्य संवर्धन और कोदो, कुटकी व रागी जैसे पारंपरिक अनाजों के पोषण संबंधी महत्व को रेखांकित करते हुए इनके अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने आने वाले समय के लिए एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। बोर्ड की योजना के अनुसार, आगामी 31 मार्च 2027 तक पूरे प्रदेश के एक हजार पारंपरिक वैद्यों का प्रमाणन पूरा कर लिया जाएगा। इस कार्यक्रम में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोण्डागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी, बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम सहित कई गणमान्य लोग और वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

