केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड के हालिया पुनर्गठन ने देश भर की फिल्मी और सांस्कृतिक दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। केंद्र सरकार द्वारा करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद इस वैधानिक संस्था की नई टीम का ऐलान किया गया है, जिसमें कुल 18 नए सदस्यों को शामिल किया गया है।
इस नई सूची में देश के कई दिग्गज और प्रतिष्ठित कलाकारों को जगह मिली है। खास बात यह है कि इस बहुप्रतिष्ठित बोर्ड में बिहार राज्य से ताल्लुक रखने वाली दो मशहूर हस्तियों—अभिनेता पंकज त्रिपाठी और वरिष्ठ फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम—को भी शामिल किया गया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, सेंसर बोर्ड की यह नई टीम सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 और नए सिनेमैटोग्राफ (सर्टिफिकेशन) रूल्स 2024 के प्रावधानों के तहत बनाई गई है। इन सभी नए सदस्यों का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से अगले तीन वर्षों या अगले आदेश तक के लिए प्रभावी रहेगा।
बोर्ड में शामिल किए गए पंकज त्रिपाठी आज के समय में भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और सहज अभिनेताओं में गिने जाते हैं। मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले के एक साधारण परिवार से आने वाले पंकज ने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (NSD) से अभिनय की तालीम हासिल की और अपने दम पर बॉलीवुड में एक मुकाम बनाया है।
दूसरी ओर, विनोद अनुपम देश के जाने-माने वरिष्ठ फिल्म समीक्षक, लेखक और कला-संस्कृति के मर्मज्ञ हैं। बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर से ताल्लुक रखने वाले विनोद अनुपम को हिंदी सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके गहन लेखन के लिए वर्ष 2002 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।
सेंसर बोर्ड में इन दोनों बिहार की विभूतियों के शामिल होने से राज्य के कला प्रेमियों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों में काफी उत्साह है। जानकारों का मानना है कि जमीनी और कलात्मक समझ रखने वाले इन चेहरों के बोर्ड में आने से फिल्मों के प्रमाणन और उनकी विषय-वस्तु की समीक्षा में अधिक संतुलन और परिपक्वता देखने को मिलेगी।
इस 18 सदस्यीय उच्चस्तरीय पैनल में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी सिनेमा जगत के बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इस नई टीम में अभिनेत्री प्रीति जिंटा, अभिनेता सुनील शेट्टी, मनोज जोशी, पल्लवी जोशी, रूपपाली गांगुली, प्रसेनजीत चटर्जी, दक्षिण भारतीय सिनेमा के जाने-माने निर्देशक प्रियदर्शन, और ग्रैमी विजेता संगीतकार रिकी केज जैसे नाम प्रमुखता से शामिल हैं। इसके अलावा अभिषेक जैन, हंसराज हंस, सुप्रिया यारलागड्डा, यतिन्द्र मिश्रा, नीला माधव पांडा, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे भी इस बोर्ड का हिस्सा हैं।
फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले उनके प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया को पारदर्शी, संतुलित और समय के अनुकूल बनाने के लिहाज से इस नए बोर्ड के गठन को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पंकज त्रिपाठी और विनोद अनुपम जैसे ज़मीन से जुड़े कलाकारों व विचारकों के बोर्ड में होने से फिल्मों के सांस्कृतिक और सामाजिक पक्षों की समीक्षा अधिक परिपक्वता के साथ हो सकेगी।

