पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने की आशंका है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने आवास ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ पर एक हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित कैबिनेट के प्रमुख मंत्रियों ने हिस्सा लिया। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध की स्थिति में भी देश के भीतर पेट्रोलियम, कच्चा तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई चेन में कोई बाधा न आए।
बैठक में सबसे अधिक चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर जताई गई, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है, और तनाव के कारण इस मार्ग पर यातायात प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति मार्गों को तैयार रखें ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर कम से कम प्रभाव पड़े।
देश के भीतर एलपीजी (LPG) और ईंधन की स्थिति पर चर्चा करते हुए सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि फिलहाल गैस की कोई कमी नहीं है। पैनिक बुकिंग में कमी आई है और होम डिलीवरी की प्रक्रिया पूरी तरह सामान्य है। औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई बढ़ाकर 50% कर दी गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों के लिए छोटे सिलेंडरों (5kg FTL) की व्यवस्था और पीएनजी (PNG) कनेक्शन के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है।
राजनयिक स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी स्वयं सक्रिय हैं और वे सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान जैसे देशों के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं। भारत का रुख स्पष्ट है कि संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव को कम किया जाए। इसके साथ ही, युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कई भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है और बाकी की सुरक्षा के लिए दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया है।
अंततः, सरकार ने जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों को सख्त चेतावनी दी है। देशभर में सप्लाई चेन की निगरानी की जा रही है और कृत्रिम किल्लत पैदा करने वालों के खिलाफ छापेमारी तेज कर दी गई है। बंदरगाहों पर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और सरकार हर पल बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति को अपडेट कर रही है। भारत का यह ‘प्रो-एक्टिव’ दृष्टिकोण आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और महंगाई पर लगाम लगाने के लिए एक मजबूत कवच साबित हो सकता है।

