इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और पारंपरिक पेट्रोल कारों (ICE Vehicles) के बीमा के बीच कई बुनियादी और तकनीकी अंतर हैं। बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही इन दोनों के बीमा ढांचे में काफी भिन्नता देखने को मिलती है, जिसे निम्नलिखित बिन्दुओ में विस्तार से समझा जा सकता है:
1. प्रीमियम की लागत (कितना है अंतर?)
मॉडल-दर-मॉडल तुलना करने पर, इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बीमा प्रीमियम आमतौर पर पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले 10% से 25% तक ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बीमा कंपनियां ईवी का बीमा करते समय उच्च जोखिम (High Risk) और महंगे स्पेयर पार्ट्स को ध्यान में रखती हैं।
2. ‘बैटरी बायस’ और आईडीवी (IDV) का खेल
पेट्रोल कारों में इंजन कुल कीमत का एक हिस्सा होता है, लेकिन ईवी में लिथियम-आयन बैटरी पैक गाड़ी की कुल लागत का 40% से 60% हिस्सा होता है। बैटरी की कीमत बहुत ज्यादा होने के कारण गाड़ी का IDV (Insured Declared Value यानी गाड़ी की बाजार में बीमा वैल्यू) बढ़ जाता है, जिससे सीधे तौर पर प्रीमियम भी महंगा हो जाता है।
3. थर्ड-पार्टी प्रीमियम पर राहत (सरकार की छूट)
एक सकारात्मक पहलू यह है कि भारतीय बीमा नियामक (IRDAI) इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए इनके थर्ड-पार्टी (TP) प्रीमियम पर 15% की छूट देता है। हालांकि, कुल बीमा महंगा होने की मुख्य वजह ‘ओन डैमेज’ (Own Damage – खुद की गाड़ी के नुकसान का बीमा) और बैटरी प्रोटेक्शन की लागत है।
4. रिपेयरिंग और तकनीकी जटिलता
पेट्रोल गाड़ियों को ठीक करने के लिए लगभग हर लोकल गैराज में मैकेनिक मिल जाते हैं और पार्ट्स आसानी से सस्ते में रिपेयर हो जाते हैं। इसके विपरीत, ईवी में जटिल सॉफ्टवेयर, सेंसर और हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिक मोटर्स होती हैं। इसके लिए केवल अधिकृत सर्विस सेंटर और विशेष तकनीशियनों की जरूरत पड़ती है। यदि थोड़ा सा भी नुकसान बैटरी पैक या उसकी केसिंग को होता है, तो रिपेयर की बजाय पूरी बैटरी बदलनी पड़ सकती है, जिससे क्लेम राशि बहुत बड़ी हो जाती है।
5. विशेष ऐड-ऑन (Add-ons) की जरूरत
पेट्रोल कारों के मुकाबले ईवी के लिए कुछ खास तरह के ऐड-ऑन कवर्स लेना जरूरी हो जाता है:
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बैटरी प्रोटेक्ट कवर (Battery Protection Cover): सड़क पर चलते समय यदि नीचे से बैटरी पर कोई पत्थर लग जाए या शॉर्ट सर्किट हो जाए, तो स्टैंडर्ड पॉलिसी इसे कवर नहीं करती। इसके लिए अलग से बैटरी कवर लेना पड़ता है।
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चार्जिग इक्विपमेंट कवर (Charging Equipment Cover): पोर्टेबल चार्जर और केबल के चोरी या खराब होने पर सुरक्षा के लिए भी अलग से ऐड-ऑन लेना पड़ता है।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि भले ही इलेक्ट्रिक गाड़ी का बीमा प्रारंभिक चरण में पेट्रोल कार की तुलना में कुछ महंगा पड़ता है और इसके लिए विशेष सावधानियों की जरूरत होती है, लेकिन ईवी की बेहद कम रनिंग और मेंटेनेंस कॉस्ट इस अंतर की आसानी से भरपाई कर देती है। सही ऐड-ऑन का चयन करके वाहन मालिक अपने खर्च को संतुलित कर सकते हैं।

