गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) की ड्राइवरलेस टैक्सी सर्विस ‘वेमो’ (Waymo) को लेकर अमेरिका में इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक और कूटनीतिक भूचाल आया हुआ है। यह पूरा विवाद किसी तकनीकी खराबी या सड़क दुर्घटना के कारण नहीं, बल्कि वेमो द्वारा अपनी रोबोटैक्सी फ्लीट को तेजी से विस्तार देने के लिए चीन में निर्मित वाहनों के इस्तेमाल को लेकर खड़ा हुआ है। अमेरिकी सांसदों और नीति निर्माताओं ने इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है।
इस विवाद की मुख्य जड़ अमेरिका की वह सख्त नीतियां और टैरिफ हैं, जो उसने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों और कनेक्टेड पार्ट्स के आयात को रोकने के लिए लागू किए हैं। अमेरिका अपनी घरेलू ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को सुरक्षित रखने और चीन को कड़ा मुकाबला देने के लिए चीनी सामानों पर भारी पाबंदियां लगा चुका है, ताकि आम अमेरिकी बाजारों में चीनी गाड़ियां आसानी से न बिक सकें।
हालाँकि, इन तमाम कड़े प्रतिबंधों के बीच गूगल समर्थित वेमो कंपनी ने एक बड़ा रास्ता निकाला। वेमो ने अपनी रोबोटैक्सी सेवा को बढ़ाने के लिए चीन की मशहूर ऑटोमोबाइल कंपनी ‘जीली’ (Geely) की सब्सिडरी ‘जीरकर’ (Zeekr) के साथ हाथ मिलाया और वहां बनी हजारों गाड़ियों को अमेरिका आयात किया। इन गाड़ियों को सैन फ्रांसिस्को, फीनिक्स और लॉस एंजिल्स जैसे अमेरिकी शहरों की सड़कों पर ‘ओजाय’ (Ojai) नाम से दौड़ाया जा रहा है।
अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में इस दोहरे रवैये को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सांसदों का कहना है कि एक तरफ अमेरिका सरकार चीन पर शिकंजा कसने के दावे करती है, वहीं देश की बड़ी तकनीक कंपनियां चीन की फैक्ट्रियों पर निर्भर होकर चीनी ऑटो सेक्टर को बढ़ावा दे रही हैं। इसे अमेरिकी कानूनों के एक बड़े ‘लूपहोल’ के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों और सांसदों को इन चीनी मूल की गाड़ियों से सबसे बड़ा खतरा डेटा चोरी और जासूसी का सता रहा है। उनका तर्क है कि आधुनिक कनेक्टेड और ऑटोनॉमस कारों में दर्जनों सेंसर्स, कैमरे और हाई-टेक हार्डवेयर लगे होते हैं। उन्हें इस बात की गंभीर आशंका है कि इन गाड़ियों के जरिए अमेरिकी शहरों की संवेदनशील लोकेशन और नागरिकों का डेटा चीन की खुफिया एजेंसियों या कंपनियों तक पहुँच सकता है।
इसके अलावा, साइबर सुरक्षा और रिमोट मैलवेयर का खतरा भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। कुछ अमेरिकी राजनेताओं ने चिंता जताई है कि यदि इन वाहनों के बुनियादी ढांचे में कोई छिपा हुआ सॉफ्टवेयर या हिडन मैलवेयर मौजूद रहा, तो भविष्य में कोई साइबर हमला करके पूरी अमेरिकी रोबोटैक्सी फ्लीट को एक साथ ठप किया जा सकता है या उसे अनियंत्रित किया जा सकता है।
इन तमाम तीखे विरोध और आरोपों के बीच वेमो ने अपनी सफाई में इन सभी सुरक्षा चिंताओं को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वे चीन से केवल गाड़ी का एक खाली ढांचा या बेस व्हीकल आयात करते हैं, जिसमें कोई भी चीनी कनेक्टेड-कार टेक्नोलॉजी या वायरलेस हार्डवेयर शामिल नहीं होता है। अमेरिका पहुँचने के बाद एरिजोना स्थित प्लांट में इन गाड़ियों पर वेमो का अपना स्वदेशी ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम और लिडार (LiDAR) फिट किया जाता है।
इस पूरे विवाद के गरमाने के बाद अमेरिकी संसद में अब ‘कनेक्टेड व्हीकल सिक्योरिटी एक्ट’ (Connected Vehicle Security Act) जैसे कड़े कानून लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। आने वाले समय में सरकार ऐसे चीनी मूल के वाहनों के आयात पर पूरी तरह रोक लगाने या उन्हें अमेरिकी सड़कों से हटाने का सख्त निर्देश दे सकती है। स्पष्ट है कि यह मामला केवल कारों का नहीं, बल्कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे भू-राजनीतिक और ट्रेड वॉर का एक नया मोर्चा बन गया है।

