छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने भू-संपदा परियोजनाओं में आबंटियों के हितों की सुरक्षा और रेरा अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने रायपुर जिले के सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1′ परियोजना के विकास कार्य अपूर्ण रहने और पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त न किए जाने के मामले में यह कड़ा रुख अपनाया है।
सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने पाया कि संबंधित परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुसार न तो निर्धारित विकास कार्य पूर्ण किए गए हैं और न ही सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया है। इन गंभीर तथ्यों के आधार पर प्राधिकरण ने इस परियोजना को अपूर्ण एवं चालू श्रेणी में मानते हुए भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के अंतर्गत विलंब के लिए ब्याज भुगतान का आदेश दिया है।
आदेश के अनुसार, प्रमोटर को आबंटी द्वारा भुगतान की गई 8 लाख 12 हजार 643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के आधार पर कुल 6 लाख 87 हजार 496 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त, 1 नवंबर 2026 से लेकर परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक आबंटी को प्रतिमाह 7 हजार 314 रुपये ब्याज के रूप में देने होंगे।
प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन न कराए जाने के मामले को भी बेहद गंभीरता से लिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भू-संपदा अधिनियम की धारा 3 के तहत पात्र परियोजनाओं का पंजीयन अनिवार्य है। इसके बावजूद पंजीयन न कराए जाने पर प्रमोटर के विरुद्ध अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत पृथक से प्रकरण दर्ज करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
इस ऐतिहासिक आदेश से यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है कि किसी भी परियोजना में केवल भूखंडों या मकानों का विक्रय कर देने मात्र से प्रमोटर की वैधानिक जिम्मेदारियां समाप्त नहीं हो जाती हैं। सड़क, नाली, विद्युत और पेयजल जैसी आधारभूत सुविधाओं को पूरा करना तथा समय पर आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना प्रमोटर का प्राथमिक कानूनी दायित्व है।
CG-RERA का यह आदेश भू-संपदा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और आबंटियों के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पूरे क्षेत्र में यह स्पष्ट संदेश गया है कि परियोजनाओं के विकास में अनावश्यक विलंब करने या नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

