पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोणा थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ तीन ईसाई परिवारों ने बजरंग दल से जुड़े 13 लोगों पर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने, मारपीट करने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का आरोप लगाया है। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, मुख्य घटना 18 अक्टूबर को उस समय घटी जब आरोपी अचानक पीड़ित परिवारों के घरों में आ धमके। पीड़ित लक्ष्मी मंडल और उनके परिवार का आरोप है कि हमलावरों ने उन पर ईसाई धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने का दबाव बनाया। इसके बाद उनके साथ न केवल बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि उनके कपड़े फाड़ने का प्रयास भी किया गया और तथाकथित ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर उन्हें सार्वजनिक रूप से पानी डालकर स्नान करने के लिए मजबूर किया गया।
इस मामले में सबसे डरावना और गंभीर पहलू नाबालिग बेटी से जुड़ा हुआ है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, आरोपियों में से एक ने परिवार की नाबालिग बेटी को निशाना बनाते हुए बेहद आपत्तिजनक और डराने वाली धमकियां दीं। उसने धमकाते हुए कहा कि अगर उन्होंने धर्म नहीं बदला और बात नहीं मानी, तो उसकी शादी जबरन किसी मुस्लिम युवक से करवा दी जाएगी और उसके साथ दुष्कर्म किया जाएगा। इस तरह की धमकियों से पूरा परिवार गहरे सदमे और खौफ में है।
पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उन्हें खुली चेतावनी दी थी कि अगर इस घटना की शिकायत पुलिस या प्रशासन से की गई, तो उनके तीनों परिवारों को जिंदा जला दिया जाएगा। लगातार मिल रही धमकियों और जान के खतरे के कारण शुरुआती दिनों में पीड़ित परिवार बुरी तरह सहमे हुए थे, लेकिन बाद में हिम्मत जुटाकर उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया और न्याय की गुहार लगाई।
परिवार की शिकायत के आधार पर, स्थानीय चंद्रकोणा थाने में 20 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने इस मामले में 13 नामजद आरोपियों और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामलों की तह तक जाने के लिए सभी पहलुओं से निष्पक्ष जांच की जा रही है।
घटना के तूल पकड़ने और पीड़ित परिवारों द्वारा अपनी जान-माल को गंभीर खतरा बताए जाने के बाद, जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। एहतियात के तौर पर पीड़ित परिवारों के घरों के बाहर पुलिस पिकेट (सुरक्षा बल) तैनात कर दी गई है ताकि उन्हें सुरक्षा का अहसास कराया जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
फिलहाल, पुलिस इस मामले में नामजद आरोपियों की तलाश के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और स्थानीय स्तर पर भी इस घटना की निंदा की जा रही है तथा सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई जा रही है।

