किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अब ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा, क्योंकि राज्य में इस वर्ष 360 नए धान उपार्जन केंद्र खोले गए हैं। इन नए केंद्रों के जुड़ने से अब पूरे छत्तीसगढ़ में कुल उपार्जन केंद्रों की संख्या बढ़कर 3,100 हो गई है। विकेंद्रीकृत व्यवस्था होने से ग्रामीण इलाकों के किसानों को अपने नजदीki केंद्रों पर ही धान बेचने की सुविधा मिलेगी, जिससे उनके परिवहन खर्च और समय दोनों की बचत होगी।
किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य देने के लिए सरकार इस बार भी 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है। इसके साथ ही, प्रति एकड़ धान खरीदी की अधिकतम सीमा 21 क्विंटल निर्धारित की गई है। इस लाभकारी मूल्य और तय सीमा के दायरे में रहकर किसान अपनी उपज आसानी से सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
उपार्जन केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारों और भीड़ से किसानों को राहत देने के लिए इस बार भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसान इस ऐप के जरिए घर बैठे आसानी से ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकते हैं। किसानों की भूमि के रकबे के अनुसार टोकन की संख्या तय की गई है—जैसे 2 एकड़ तक के लिए 1 टोकन, 2 से 10 एकड़ तक के लिए अधिकतम 2 टोकन, और 10 एकड़ से अधिक की भूमि वाले किसानों को अधिकतम 3 टोकन दिए जाएंगे।
धान खरीदी की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए 10 तारीख से टोकन मिलने की शुरुआत हो जाएगी, ताकि किसान समय पर अपनी व्यवस्थाएं कर सकें। इसके अलावा, जिन किसानों ने अभी तक पंजीयन या रकबे में संशोधन नहीं कराया है, वे संबंधित विभागों के माध्यम से अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। सरकार के इन सकारात्मक कदमों से अन्नदाताओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है और धान खरीदी का यह सीजन किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होने की उम्मीद है।

