अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाने वाला पावन पर्व ‘करवा चौथ’ इस बार बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाने के साथ ही इस निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है, जिसमें महिलाएं पूरे दिन पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
त्योहार को लेकर देश भर के बाजारों में पिछले कई दिनों से भारी चहल-पहल बनी हुई है। महिलाओं ने साड़ियों, सूट, आकर्षक आभूषणों और मेकअप के सामानों की जमकर खरीदारी की है। बाजारों में मेहंदी लगवाने और ब्यूटी पार्लर में सजने-संवरने के लिए भी महिलाओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिससे दुकानदारों के चेहरों पर भी काफी रौनक है।
ज्योतिष पंचांग के अनुसार, इस बार करवा चौथ की पूजा के लिए शाम को बेहद शुभ मुहूर्त मिल रहा है। व्रती महिलाएं शाम के समय माता पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी और करवा माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी। पूजा के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनने का विशेष विधान है, जिसे लेकर महिलाओं में काफी धार्मिक आस्था और उत्साह रहता है।
इस पर्व का सबसे मुख्य आकर्षण चांद का दीदार और अर्घ्य देना होता है। हालांकि, मौसम विभाग और बादलों की स्थिति को देखते हुए कुछ इलाकों में चांद के दीदार के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। इसके बावजूद महिलाओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है और वे चंद्रमा के निकलने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
चंद्रमा के दर्शन के बाद महिलाएं छलनी से चांद और अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके पश्चात पति के हाथों से जल ग्रहण कर और उन्हें मिठाई खिलाकर महिलाएं अपना कठिन निर्जला व्रत खोलती हैं। इस दौरान कई जगहों पर परिवार की वरिष्ठ महिलाओं या सास को उपहार और आशीर्वाद देने की परंपरा भी पूरी निष्ठा से निभाई जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ के इस व्रत की शुरुआत पौराणिक काल से जुड़ी है। महाभारत काल में द्रौपदी द्वारा पांडवों की रक्षा और संकट टालने के लिए भगवान श्री कृष्ण के कहने पर यह व्रत रखने का उल्लेख मिलता है। तब से लेकर आज तक यह परंपरा सुहागिनों के बीच प्रेम, समर्पण और अटूट रिश्ते का प्रतीक बनी हुई है।
यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करने का भी अवसर है। आधुनिक दौर में कामकाजी महिलाएं भी इस परंपरा को पूरी शिद्दत से निभाती हैं। कुल मिलाकर यह त्योहार परिवार में खुशियों का संचार करता है और हर घर में उत्सव का माहौल बना रहता है।

