बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ (Cyclone Arnab) का भीषण असर अब छत्तीसगढ़ के मौसम पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। इस चक्रवात के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं, जिसके चलते मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र ने दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
खतरनाक मौसम को देखते हुए एहतियात के तौर पर राज्य के कई प्रभावित जिलों में जिला प्रशासन द्वारा स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। बस्तर संभाग और उससे लगे दुर्ग व रायपुर संभाग के कुछ जिलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, बालोद, कांकेर, राजनांदगांव, दुर्ग और धमतरी जैसे जिलों में स्थानीय प्रशासन व जिला शिक्षा अधिकारियों ने बच्चों के लिए छुट्टी के आदेश जारी कर दिए हैं।
यह अवकाश सभी शासकीय, अशासकीय (प्राइवेट) और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर समान रूप से लागू किया गया है। हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह छुट्टी केवल छात्र-छात्राओं के लिए है, जबकि शिक्षकों और अन्य विद्यालयीन कर्मचारियों को प्रशासन द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात ‘अर्नब’ के चलते राज्य में नमीयुक्त हवाओं का प्रवाह तेजी से बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और कांकेर समेत कई जिलों में लगातार मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में मौसम विभाग ने रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है।
भारी बारिश के साथ-साथ इस चक्रवाती तूफान के कारण तेज हवाएं चलने की भी पूरी संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रभावित इलाकों में 50 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है और कई स्थानों पर आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का खतरा भी बना हुआ है। ऐसी स्थिति में कच्चे मकानों और पेड़ों के आसपास रहना खतरनाक साबित हो सकता है।
संभावित आपदा और खराब हालातों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गए हैं। सभी जिला मुख्यालयों में आपदा प्रबंधन दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति, जलभराव या मार्ग अवरुद्ध होने पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके। निचले इलाकों और नदी-नालों के पास रहने वाले लोगों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासन ने आम नागरिकों और विशेषकर अभिभावकों से अपील की है कि वे इस खराब मौसम के दौरान पूरी सावधानी बरतें। बच्चों को घरों से बाहर न निकलने दें और अनावश्यक यात्राओं से बचें। तेज हवाओं और बारिश के समय बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर और कमजोर दीवारों से दूरी बनाए रखें। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए जा रहे ताजा अपडेट्स और निर्देशों का लगातार पालन करें।

