देशभर में शादियों, पार्टियों और त्योहारों के दौरान बजने वाले तेज आवाज के डीजे (DJ) और लाउडस्पीकर आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। अत्यधिक शोर न केवल मानसिक शांति को भंग करता है, बल्कि बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए विभिन्न राज्यों की अदालतों और प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है।
हाल ही में न्यायपालिका ने ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालतों का साफ कहना है कि रात के समय या निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाना नागरिकों के जीने के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है। इस दिशा में प्रशासनिक मशीनरी को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों का कड़ाई से पालन करवाएं।
शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को आम जनता के लिए अब बेहद आसान बना दिया गया है। विभिन्न राज्यों (जैसे हाल ही में बिहार और महाराष्ट्र आदि) में अदालती आदेशों के बाद पुलिस नियंत्रण कक्ष और इमरजेंसी नंबर 112 को सीधे तौर पर ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों से जोड़ा गया है। यदि आपके आस-पास कोई तेज आवाज में डीजे बजा रहा है, तो आप तुरंत 112 डायल कर सकते हैं।
कहां और कैसे करें शिकायत ?
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पुलिस कंट्रोल रूम (112 या 100): यदि तुरंत तेज आवाज में डीजे बज रहा है और आपको तत्काल राहत चाहिए, तो आप तुरंत 112 नंबर (या अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन) पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पुलिस मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने के लिए बाध्य है।
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स्थानीय पुलिस थाना: आप अपने नजदीकी थाने में लिखित शिकायत दे सकते हैं। अगर लाउडस्पीकर किसी अनुष्ठान, शादी या पार्टी में बिना अनुमति के बज रहा है, तो पुलिस इसे तुरंत बंद करवा सकती है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (State Pollution Control Board): अगर लगातार या किसी व्यावसायिक संस्थान/कारखाने से ध्वनि प्रदूषण हो रहा है, तो आप अपने राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत कर सकते हैं।
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) या जिला प्रशासन: गंभीर मामलों या बार-बार नियमों के उल्लंघन पर आप जिला कलेक्टर (DM) या स्थानीय प्रशासन को लिखित आवेदन दे सकते हैं।
सबसे राहत की बात यह है कि पुलिस प्रशासन द्वारा ऐसे मामलों में शिकायत करने वाले नागरिक की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाती है, ताकि आम लोग बिना किसी डर या सामाजिक दबाव के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचकर या तो आवाज कम करवाती है या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कदम उठाती है।
कानूनी प्रावधानों के तहत देश में दिन और रात के समय के हिसाब से ध्वनि की सीमा (डेसिबल लिमिट) तय की गई है। रिहायशी इलाकों में दिन के वक्त अधिकतम 55 डेसिबल और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच केवल 45 डेसिबल तक की आवाज की अनुमति होती है, जबकि शांत क्षेत्रों (अस्पताल, स्कूल के आसपास) में यह सीमा और भी कम है।
क्षेत्र का प्रकार (Area Category) दिन का समय (सुबह 6:00 से रात 10:00 बजे तक) रात का समय (रात 10:00 से सुबह 6:00 बजे तक)
औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area) 75 डेसिबल (dB) 70 डेसिबल (dB)
व्यापारीक क्षेत्र (Commercial Area) 65 डेसिबल (dB) 55 डेसिबल (dB)
रिहायशी क्षेत्र (Residential Area) 55 डेसिबल (dB) 45 डेसिबल (dB)
शांत क्षेत्र (Silence Zone) (अस्पताल, स्कूल आदि के 100 मीटर के दायरे) 50 डेसिबल (dB) 40 डेसिबल (dB)
नियमों के मुताबिक रात 10:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक किसी भी स्थिति में लाउडस्पीकर या डीजे के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है। यदि किसी विशेष सांस्कृतिक या धार्मिक आयोजन के लिए प्रशासन से अनुमति ली भी गई है, तब भी तय समय सीमा और डेसिबल के नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
बिना अनुमति के या तय सीमा से तेज आवाज में डीजे बजाने वालों के खिलाफ पुलिस को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। पुलिस बिना किसी देरी के मौके पर पहुंचकर भारी आवाज वाले एम्पलीफायर, साउंड बॉक्स और डीजे मशीन को जब्त कर सकती है तथा आयोजकों के खिलाफ कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर सकती है।
विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि केवल कानूनों के होने से तब तक बदलाव नहीं आ सकता, जब तक आम नागरिक खुद आगे आकर जागरूक न हों। यदि आपके क्षेत्र में भी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, तो तुरंत पुलिस या संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचित करें ताकि समाज को ध्वनि प्रदूषण के इस संकट से बचाया जा सके।

