भारतीय रेलवे के समय पालन (Punctuality) को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन दावों में यह कहा जा रहा है कि देश भर में ट्रेनों के संचालन समय में भारी गिरावट आई है। रेलवे मंत्रालय ने इन तमाम दावों का कड़ा संज्ञान लेते हुए इन्हें पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे आंकड़े पूरी तरह से संदर्भ से बाहर हैं। जिन आंकड़ों का हवाला देकर ट्रेनों के लेट होने का दावा किया जा रहा है, वे मुख्य रूप से कोरोना काल (2020-2021 और 2021-22) के समय के हैं। कोविड-19 महामारी के उस दौर में पटरियों पर सामान्य दिनों की तुलना में बहुत कम ट्रेनें संचालित हो रही थीं।
कम ट्रेनों के संचालन और ट्रैक पर ट्रैफिक न होने की वजह से उस विशेष अवधि में ट्रेनों की समयबद्धता असामान्य रूप से बहुत अधिक दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के उस विशिष्ट और असाधारण दौर की तुलना आज के पूर्ण रूप से बहाल और भारी भीड़भाड़ वाले सामान्य रेल परिचालन से करना किसी भी प्रकार से तर्कसंगत नहीं है।
रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा समय में भी भारतीय रेलवे का समय-पालन का स्तर लगातार 77% से अधिक बना हुआ है। यह प्रदर्शन तब है जब रेलवे नेटवर्क पर यात्री गाड़ियों की भारी संख्या और मालगाड़ियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद रेलवे अपने समय-पालन के मानकों को बनाए रखने के लिए लगातार तकनीकी सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में ट्रेनों की औसत गति और परिचालन को सुधारने के लिए कई कड़े कदम उठाए गए हैं। सिग्नलिंग प्रणाली का आधुनिकीकरण, ट्रैक मेंटेनेंस के लिए अत्याधुनिक मशीनों का उपयोग और व्यस्त रूट्स पर बॉटल्स नेक्स को खत्म करने का काम तेजी से किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और समय पर सफर मिल सके।
रेलवे ने सोशल मीडिया पर इस तरह की भ्रामक सामग्री और पुराने वीडियो साझा करने वालों को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। रेलवे प्रशासन ऐसे हैंडल्स और प्लेटफॉर्म्स पर पैनी नजर रखे हुए है जो बिना किसी प्रामाणिक तथ्य के गलत आंकड़े पेश करके यात्रियों के बीच भ्रम पैदा कर रहे हैं और रेलवे की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अंत में, रेल मंत्रालय ने देश के सभी रेल यात्रियों और आम नागरिकों से यह अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे किसी भी भ्रामक दावे या वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी के लिए रेलवे के अधिकृत चैनलों और बयानों पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।

