भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के चलते गंभीर चेतावनी जारी करते हुए 8 अक्टूबर को देश के 16 राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात का बड़ा अलर्ट घोषित किया था। इस दौरान मानसून के अंतिम दौर और चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आया, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में भी मौसम ने करवट ली, जहाँ आसमान में बादल छाए रहने के साथ-साथ लगभग 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां दर्ज की गईं। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान दिल्ली का अधिकतम तापमान नियंत्रित रहा और सुबह व शाम के वक्त हल्की ठंडक का अहसास होने लगा है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाओं का दौर देखने को मिला। यूपी के गाजियाबाद, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज समेत तराई और पूर्वी इलाकों में बादलों की आवाजाही के साथ वज्रपात की चेतावनी दी गई, जबकि बिहार के पटना, गया, पश्चिमी चंपारण और भागलपुर समेत अन्य जिलों में भी तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ीं।
पहाड़ी राज्यों—उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर—में मौसम का मिजाज विशेष रूप से आक्रामक रहा। उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल और हिमाचल के शिमला, सोलन, कांगड़ा तथा जम्मू-कश्मीर के कई ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ 55 से 75 किमी/घंटा की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलीं, जिसके चलते संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन (Landslide) का खतरा बढ़ गया।
मध्य भारत और पश्चिमी क्षेत्रों की बात करें तो मध्य प्रदेश के शहडोल, मंडला, इंदौर और उज्जैन तथा राजस्थान के जयपुर, अजमेर, बीकानेर व चुरू संभाग में भी छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें दर्ज की गईं। इन राज्यों में कई जगहों पर तेज सतही हवाओं ने फसलों को भी प्रभावित किया।
इसके अलावा पूर्वी और दक्षिणी भारत के तटीय राज्यों में मौसमी गतिविधियां काफी सक्रिय रहीं। पश्चिम बंगाल (विशेषकर उप-हिमालयी क्षेत्र और कोलकाता), ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दक्षिण के तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का ऑरेंज व येलो अलर्ट जारी किया गया।
मौसम विभाग ने इस भारी उठापटक के मद्देनजर आम जनता और किसानों को पूरी सतर्कता बरतने की सलाह दी। विशेषकर वज्रपात (आकाशीय बिजली) की आशंका वाले क्षेत्रों में लोगों से खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे शरण न लेने की अपील की गई, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

