यह बड़ा निर्णय रविवार देर रात चली लंबी और मैराथन बैठकों के बाद लिया गया। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के प्रतिनिधियों के बीच यह उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। बैठक में सरकार और बैंकिंग एसोसिएशन का रुख सकारात्मक रहने के कारण यूनियनों ने अपनी हड़ताल को स्थगित करने का यह महत्वपूर्ण फैसला लिया।
यूनियनों की मुख्य मांगों में सबसे प्रमुख मांग सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने यानी ‘5-डे बैंकिंग’ की थी। इस संवेदनशील और लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे पर बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है कि इस पर विचार के लिए एक संयुक्त उच्च-स्तरीय समिति का तुरंत गठन किया जाएगा, जो सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर इस पर जल्द ही ठोस समाधान निकालेगी।
इसके अलावा, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। यूनियनों द्वारा इस योजना को लेकर उठाए गए मुद्दों और आपत्तियों पर संज्ञान लिया गया है, और इसे लेकर सरकार को उचित संशोधन प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल हड़ताल को पूरी तरह से रद्द नहीं किया गया है, बल्कि इसे केवल ‘स्थगित’ किया गया है। यदि आने वाले समय में संबंधित मुद्दों पर सरकार या आईबीए की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो बैंक यूनियनें भविष्य में फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए स्वतंत्र रहेंगी।
हड़ताल टलने के बाद अब देश भर के सभी सरकारी और निजी बैंकों की शाखाएं अपने तय समय पर खुलेंगी। इसके साथ ही एटीएम सेवाएं, डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन फंड ट्रांसफर जैसे सभी डिजिटल वित्तीय लेन-देन भी बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से चलते रहेंगे।
कुल मिलाकर, इस फैसले से त्योहारी सीजन से पहले आम नागरिकों, व्यापारियों और कॉरपोरेट सेक्टर को बड़ी राहत मिली है। बैंक यूनियनों और प्रबंधन के बीच बनी इस नई सहमति से बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता आने की उम्मीद है, और ग्राहक बिना किसी बाधा के अपने सभी जरूरी वित्तीय कार्य पूरे कर सकेंगे।

