छत्तीसगढ़ में डीप डिप्रेशन और मानसून के सक्रिय सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जन-जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के कई जिलों में नदियां और नाले उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है और सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को भी प्रदेशभर में बारिश का दौर लगातार जारी रहा।
राजधानी रायपुर में सुबह से ही आसमान में काले बादलों ने डेरा डाला हुआ है और लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले रायपुर में पिछले 24 घंटों के दौरान 11 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। राजधानी के अलावा सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग संभागों के विभिन्न जिलों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मौसमी हलचल दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे लगे दक्षिण अंदरूनी ओडिशा के ऊपर बने एक स्पष्ट अवदाब (डिप्रेशन) के कारण है। यह सिस्टम लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और अगले 12 घंटों तक अपनी तीव्रता बनाए रखने की संभावना है। इसके बाद इसके कमजोर होकर एक निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने के आसार हैं।
बीते 30 घंटों के दौरान दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में व्यापक वर्षा हुई है, जिसमें कुछ स्थानों पर बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। खासकर बस्तर संभाग के जगदलपुर में सबसे अधिक 25 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा लोहंडीगुड़ा में 23, बास्तानार और नानगुर में 22 सेंटीमीटर तक पानी गिरा है।
नमी और बादलों के इस भारी जमावड़े के कारण प्रदेश के अन्य हिस्सों जैसे भनपुरी, मदार्पाल, तोकापाल, माकड़ी, बस्तर और केशकाल में भी 19 से 21 सेंटीमीटर तक की भारी वर्षा दर्ज की गई है। बचेली, देवभोग, कोहकामेटा, अंतागढ़, नारायणपुर और कोंडागांव जैसे इलाकों में भी 15 से 18 सेंटीमीटर तक बारिश होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
मौसम विभाग ने आज शनिवार के लिए भी प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। राजधानी रायपुर में भी आज आकाश मेघमय रहने तथा रुक-रुक कर बौछारें पड़ने के आसार हैं। उत्तर-पश्चिम हिस्से के सरगुजा और बिलासपुर संभाग विशेष रूप से इस भारी बारिश की जद में बने हुए हैं।
राहत भरी खबर यह है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 27 सितंबर से पूरे छत्तीसगढ़ में मानसून की इस रफ्तार के कमजोर पड़ने और बारिश कम होने की संभावना है। इसके बाद लोगों को जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों से राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे सामान्य जन-जीवन के धीरे-धीरे पटरी पर लौटने के आसार हैं।

