बंगाल की खाड़ी में बने एक गंभीर मौसम तंत्र और चक्रवाती प्रभाव (जिसे रिपोर्ट्स में चक्रवात ‘अर्नब’ कहा जा रहा है) के कारण ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली है। इस मौसमी आफत ने दोनों राज्यों के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं के चलते कई इलाकों में नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में पानी भर गया है, जिससे आम लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं।
ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जिलों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है। मलकानगिरी में कांकुरुकोंडा और कन्याश्रम जैसे प्रमुख पुलों के ऊपर 3 से 4 फीट तक पानी बहने के कारण कई गांवों का सड़क संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। पानी के तेज बहाव और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रभावित जिलों पुरी, गंजाम, गजपति और मलकानगिरी में सभी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखने का आदेश दिया है।
मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम तटों से टकराने के बाद कमजोर तो पड़ा है, लेकिन इसका असर अभी भी व्यापक रूप से बना हुआ है। तटीय इलाकों में 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य मार्गों पर पानी भरने के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और जगह-जगह गाड़ियां लंबी कतारों में फंसी हुई हैं।
तबाही के इस मंजर को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकारों की आपदा प्रबंधन एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं। ओडिशा और आंध्र प्रदेश के संवेदनशील और निचले इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जहां उनके खाने-पीने और चिकित्सीय सहायता की व्यवस्था की गई है। एहतियात के तौर पर मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है, क्योंकि समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं।
इस चक्रवाती प्रभाव और मानसूनी गतिविधियों का असर सिर्फ दक्षिण-पूर्व तटों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसका विस्तार देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और हिमाचल प्रदेश समेत करीब 22 राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। लगातार बदल रहे इस मौसम ने धान और अन्य खरीफ फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

