फुटबॉल जगत के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी ने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का अधिकारिक ऐलान कर दिया है। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में स्पेन के खिलाफ मिली दिल दहला देने वाली हार के कुछ महीनों बाद, 39 वर्षीय मेसी ने एक भावुक संदेश के जरिए नेशनल टीम से विदाई लेने का यह कड़ा फैसला लिया है। उनके इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल के पन्नों पर एक अत्यंत शानदार और बेजोड़ युग का अंत हो गया है, जिसे खेल प्रेमियों द्वारा हमेशा याद रखा जाएगा।
अपने विदाई संदेश में मेसी ने साझा किया कि वर्ल्ड कप के उस महामुकाबले के बाद उन्होंने अपने खेल भविष्य को लेकर काफी गहन विचार किया था। उन्होंने माना कि यह फैसला उनके जीवन और करियर के सबसे मुश्किल और दुखद पलों में से एक है, लेकिन उनके अनुसार अब संन्यास लेने का यही सही और सटीक समय था। उन्होंने कहा कि उन्होंने अर्जेंटीना की जर्सी के लिए हमेशा अपना शत-प्रतिशत दिया है और उनका एकमात्र उद्देश्य देशवासियों को मैदान पर खुशी देना और उन्हें अपनी राष्ट्रीय पहचान पर गर्व महसूस कराना रहा है।
मेसी के शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे चमकदार उपलब्धि साल 2022 में आई, जब उन्होंने कतर की धरती पर अर्जेंटीना को फीफा वर्ल्ड कप का ताज पहनाया। यह खिताब उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद भावुक और खास था, क्योंकि इससे पहले उन्हें साल 2014 के वर्ल्ड कप फाइनल में जर्मनी के हाथों निराशाजनक हार झेलनी पड़ी थी। कतर के रोमांचक फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने पेनल्टी शूटआउट में फ्रांस को मात दी थी, जहां निर्धारित और अतिरिक्त समय तक मुकाबला 3-3 से बराबरी पर रहा था और मेसी ने दो महत्वपूर्ण गोल दागे थे।
यह ऐतिहासिक विजय अर्जेंटीना के लिए 36 साल के लंबे अंतराल के बाद पहली और कुल मिलाकर तीसरी वर्ल्ड कप ट्रॉफी थी। इस सफलता के साथ ही मेसी ने देश के साथ चले आ रहे लंबे खिताबी सूखे को पूरी तरह से समाप्त कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने साल 2021 में कोपा अमेरिका का खिताब जीतकर अर्जेंटीना के लिए अपना पहला बड़ा सीनियर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट अपने नाम किया, जिसके ठीक बाद 2024 में भी उनकी टीम ने लगातार दूसरी बार इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया।
यह पहला मौका नहीं था जब मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा की हो, क्योंकि इससे पहले साल 2016 में भी कोपा अमेरिका के फाइनल में चिली से हार मिलने के बाद उन्होंने ऐसा ही भावुक कदम उठाया था। हालांकि, उस समय उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार कर वापसी की और आने वाले वर्षों में अपनी टीम को कोपा अमेरिका और वर्ल्ड कप जैसे सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाया। उनकी इस वापसी ने अंततः अर्जेंटीना के फुटबॉल इतिहास को पूरी तरह से बदलकर रख दिया।
अपने रिकॉर्ड्स के सफर में मेसी ने साल 2006 से लेकर 2026 तक कुल छह फीफा वर्ल्ड कप संस्करणों में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने 34 मैच खेलते हुए कुल 21 गोल दागे। 2026 के अपने आखिरी वर्ल्ड कप अभियान में भी उनका प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा, जहां उन्होंने 8 गोल और 4 शानदार असिस्ट करते हुए टीम को फाइनल तक पहुंचाया। वर्ल्ड कप इतिहास में सर्वाधिक गोल करने के मामले में वह वर्तमान में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे से ठीक पीछे दूसरे स्थान पर काबिज हैं।
अर्जेंटीना की जर्सी के साथ मेसी का रिकॉर्ड बेजोड़ रहा है, क्योंकि वह देश के लिए सबसे ज्यादा 203 मैच खेलने वाले और सर्वाधिक 124 गोल दागने वाले खिलाड़ी हैं। इसके साथ ही वह दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल इतिहास के भी सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय गोल स्कोरर बन चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय पटल को अलविदा कहने के बावजूद, उनके चाहने वालों के लिए एक राहत की बात यह है कि वह अमेरिका के फुटबॉल क्लब इंटर मियामी के लिए अपना क्लब करियर जारी रखेंगे, जिसके साथ उनका अनुबंध वर्ष 2028 तक प्रभावी है।

