महाराष्ट्र सरकार ने 5 मार्च 2026 को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत धर्म परिवर्तन से पहले सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
इस नए विधेयक के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:
पूर्व सूचना और अनुमति: धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को 60 दिन पहले नोटिस देना होगा और अनुमति लेनी होगी।
पंजीकरण: धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, उसे 25 दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के पास पंजीकृत कराना होगा। ऐसा न करने पर परिवर्तन को अमान्य (null and void) माना जाएगा।
शिकायत और जांच: यदि किसी व्यक्ति का रक्त संबंधी (blood relative) धर्म परिवर्तन के अवैध होने की शिकायत करता है, तो पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच करेगी।
उद्देश्य: राज्य सरकार के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य जबरन, लालच, धोखे या प्रलोभन के माध्यम से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।
अन्य राज्यों की स्थिति:
उत्तर प्रदेश: यहाँ पहले से ही कड़ा कानून लागू है। 2024 के संशोधन के बाद, जबरन धर्म परिवर्तन के कुछ मामलों में आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।
उत्तराखंड और राजस्थान: इन राज्यों ने भी 2025 में अपने कानूनों को सख्त करते हुए धर्म परिवर्तन से पहले नोटिस देने के प्रावधानों को मंजूरी दी है।
गुजरात: यहाँ भी धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति आवश्यक है, हालांकि इसके कुछ प्रावधान वर्तमान में कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

