यूएस स्टेट डिपार्टमेंट (US State Department) ने सितंबर के वीजा बुलेटिन में अमेरिकी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हजारों भारतीयों को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी के अनुसार, इस साल 30 सितंबर को वित्तीय वर्ष 2026 समाप्त होने से पहले ही भारत के लिए तय EB-1 कैटेगरी का कोटा पूरी तरह से समाप्त हो सकता है।
यह स्थिति मुख्य रूप से अत्यधिक मांग और वीजा के भारी उपयोग के कारण उत्पन्न हुई है। स्टेट डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया है कि आने वाले हफ्तों में इस कैटेगरी को अस्थायी रूप से ‘अनुपलब्ध’ घोषित करना पड़ सकता है, जिससे अमेरिका में स्थायी निवास की चाह रखने वाले योग्य पेशेवरों की राह काफी मुश्किल हो जाएगी।
यह विशेष कैटेगरी उन प्रतिभाशाली विदेशी नागरिकों के लिए होती है जिनके पास असाधारण काबिलियत होती है। इस सूची में मुख्य रूप से प्रोफेसर, रिसर्चर, मल्टीनेशनल कंपनियों के बड़े एग्जीक्यूटिव और मैनेजर शामिल हैं, जो अपनी विशेषज्ञता के दम पर अमेरिका में कार्यरत हैं। कोटा पूरा होने से इन श्रेणियों के लोगों के पेंडिंग आवेदनों और अप्रूवल पर रोक लग सकती है।
मौजूदा नियमों के तहत, इमिग्रेशन एंड नेशनेलिटी एक्ट (INA) की धारा 201 के प्रावधानों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 के लिए कुल वैश्विक रोजगार-आधारित इमिग्रेशन सीमा 186,317 निर्धारित की गई है। कानून के मुताबिक प्रति-देश सीमा कुल वार्षिक रोजगार सीमा का केवल 7 प्रतिशत तय की गई है, जो कि 28,862 बनती है। भारत जैसे बड़े देशों के लिए यह कोटा मांग के मुकाबले काफी कम साबित हो रहा है।
अमेरिका में भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार आधारित अन्य श्रेणियां पहले से ही भारी बैकलॉग या प्रतिबंधों से जूझ रही हैं। भारत के लिए EB-2 और EB-5 श्रेणियां पहले से ही अनुपलब्ध चल रही हैं, जबकि EB-3 श्रेणी में भी आवेदकों की लंबी कतार लगी हुई है। ऐसे में EB-1 पर मंडराता यह संकट भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अमेरिकी प्रशासन इस पूरी स्थिति पर लगातार करीब से नजर बनाए हुए है और जरूरत के हिसाब से जरूरी प्रशासनिक बदलाव कर रहा है। यदि यह कोटा समय से पहले समाप्त हो जाता है, तो प्रभावित आवेदकों को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत और कोटे के नवीनीकरण का इंतजार करना होगा।

