उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत माता के चरणों में झुकना देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है और इससे कोई भी तमिल विरोधी नहीं बन जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि देशभक्ति और क्षेत्रीय पहचान एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों मिलकर भारत की विविधता को मजबूत बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत अनेक भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं का संगम है, जहां तमिल भाषा और संस्कृति का विशेष और गौरवशाली स्थान है। किसी भी समुदाय या भाषा के प्रति सम्मान रखना सभी नागरिकों का कर्तव्य है और राष्ट्र के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना किसी भी रूप में क्षेत्रीय अस्मिता के खिलाफ नहीं है।
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उपराष्ट्रपति ने लोगों से आपसी सद्भाव और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों को सामाजिक एकता पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है और सभी को मिलकर राष्ट्रीय एकता को और मजबूत करना चाहिए।

