ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सोलर प्रोडक्ट्स (solar cells and panels) पर125.87% (लगभग 126%) का भारी शुरुआती काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) यानी आयात शुल्क लगा दिया है। यह फैसला 24-25 फरवरी 2026 को लिया गया है।
इस कार्रवाई के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- कारण: अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) का मानना है कि भारत सरकार अपने सोलर निर्माताओं को अनुचित सब्सिडी दे रही है, जिससे वे अमेरिकी बाजार में अपने उत्पाद बहुत कम कीमत पर बेच पा रहे हैं और स्थानीय अमेरिकी उत्पादकों को नुकसान हो रहा है।
- प्रभावित देश: भारत के साथ-साथ
(86% से 143%) और
(81%) पर भी भारी शुल्क लगाए गए हैं।
- भारतीय बाजार पर असर: इस खबर के आते ही भारतीय सोलर कंपनियों जैसे Waaree Energies और Premier Energies के शेयरों में भारी गिरावट (15% तक) देखी गई।
- व्यापार समझौते पर खतरा: यह कदम भारत और अमेरिका के बीच होने वाली आगामी ट्रेड डील के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, जिसमें भारत पर टैरिफ कम करने की बात चल रही थी।
महत्वपूर्ण तिथियां और जानकारी:
- फाइनल फैसला: सब्सिडी की जांच पर अंतिम निर्णय 6 जुलाई 2026 तक आने की उम्मीद है।
- निर्यात डेटा: साल 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग $792.6 मिलियन के सोलर प्रोडक्ट्स का निर्यात किया था, जो 2022 की तुलना में नौ गुना ज्यादा है।
- सामान्य टैरिफ से अलग: यह 126% शुल्क, ट्रंप प्रशासन द्वारा हाल ही में सभी देशों पर लगाए गए 10% के सामान्य बेसलाइन टैरिफ से अलग है।

