27 /02 /2026 : रिपोर्ट के अनुसार, नए नियमों का सबसे बड़ा प्रहार ड्राइवरों के व्यवहार पर है. अब तक नियम केवल ‘जुर्माना’ भरने तक सीमित थे, लेकिन अब सरकार ने इसे ‘बिहेवियरल कंट्रोल’ (व्यवहार नियंत्रण) से जोड़ दिया है. नए कानून के मुताबिक, यदि कोई ड्राइवर एक साल के भीतर 5 बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो परिवहन विभाग (RTO) के पास उसका लाइसेंस निलंबित या हमेशा के लिए रद्द करने का पूरा अधिकार होगा।
सरकार पाइंट बेस्ट नया सिस्टम ला सकती है। इस नये नियम के तहत अगर आप साल में 5 बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं तो ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड या रद्द हो सकता है। बकाया टोल होने पर एनओसी नहीं मिलेगी ।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का मानना है कि यह सिस्टम लोगों को जिम्मेदारी से वाहन चलाने के लिए मोटिवेट करेगा। अगर किसी ड्राइवर के सारे अंक खत्म हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस छह महीने तक के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।
सरकार जिस नई व्यवस्था पर काम कर रही है। उसे ग्रेडेड अंक प्रणाली कहा जा रहा है। इस सिस्टम में हर ड्राइवर के लाइसेंस पर तय अंक दिए जाएंगे। जब भी कोई चालक ट्रैफिक नियम तोड़ेगा उसके अंक कम कर दिए जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति तेज रफ्तार से गाड़ी चलाता है, सिग्नल तोड़ता है, राॅन्ग डायरेक्शन में गाड़ी चलाता है या शराब पीकर ड्राइविंग करता है, तो उसके अंक तेजी से कट सकते हैं। यह व्यवस्था ड्राइविंग में डिसिप्लिन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम मानी जा रही है।
बता दें कि भारत में सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. हर साल लाखों सड़क हादसे दर्ज किए जाते हैं। जिनमें हजारों लोगों की जान चली जाती है। हादसों की बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ जुर्माना बढ़ाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती। इसी वजह से सरकार अब लोगों की सोच और ड्राइविंग आदतों को बदलने पर ज्यादा जोर दे रही है। नया अंक आधारित सिस्टम सीधे जुर्माने से आगे बढ़कर ड्राइवर के व्यवहार पर असर डालने की कोशिश करेगा। जब नियम तोड़ने पर लाइसेंस के अंक कम होंगे, तो ड्राइवर खुद सतर्क रहने लगेंगे।

