महज 18 साल की भारतीय पर्वतारोही काम्या कार्तिकेयन (Kaamya Karthikeyan) ने साउथ पोल पहुंचकर इतिहास रच दिया है। माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिरते तापमान, बर्फीले तूफानों और करीब 115 किलोमीटर लंबे कठिन सफर के बावजूद काम्या ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के साथ यह असाधारण उपलब्धि हासिल की। उनकी इस सफलता ने देशभर में गर्व और प्रेरणा का भाव पैदा किया है।
अंटार्कटिका की कठोर परिस्थितियों में साउथ पोल तक का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। काम्या ने सीमित संसाधनों, भारी वजन वाले साजो-सामान और बेहद कठिन भूभाग के बीच यह यात्रा पूरी की। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी कम उम्र में इस तरह का साहसिक अभियान पूरा करना असाधारण है और यह उनकी शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती को भी दर्शाता है।
काम्या कार्तिकेयन की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खेल और साहसिक जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाइयां दी हैं। उनकी सफलता न सिर्फ युवा पीढ़ी, बल्कि खासतौर पर लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है, जो यह साबित करती है कि हौसला बुलंद हो तो दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियां भी जीती जा सकती हैं।

